पदोन्नति बनी विवाद की वजह, नई पदस्थापना पर संचालक और सर्किल प्रभारी आमने-सामने; मामला मुख्यालय तक पहुंचा
kamlesh Yadav | Umaria
मध्यप्रदेश वन विभाग में पदोन्नति के बाद हुई नई पदस्थापनाओं ने विभाग के भीतर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। नई पोस्टिंग को लेकर अधिकारियों के बीच ऐसा टकराव सामने आया कि मामला सीधे वन मुख्यालय तक पहुंच गया। आरोप है कि पदस्थापना प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारों में हस्तक्षेप और मनमाने निर्णय लिए गए, जिससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों ने लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि वर्षों से संवेदनशील क्षेत्रों में काम कर रहे अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर ऐसे स्थानों पर भेजा गया जहां उनके अनुभव का लाभ नहीं मिल पाएगा। वहीं कई महत्वपूर्ण पद खाली छोड़ दिए गए हैं, जिससे वन संरक्षण और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि नई पदस्थापनाओं को लेकर संचालक और संबंधित सर्किल प्रभारी के बीच मतभेद इतने बढ़ गए कि पूरा मामला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में पहुंच गया। विभाग के अंदर इस फैसले को लेकर लगातार चर्चाओं का दौर जारी है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि पदस्थापनाएं योग्यता, अनुभव और आवश्यकता के आधार पर नहीं हुईं तो इसका सीधा असर जंगलों की सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और फील्ड कार्यों पर पड़ेगा। कई अधिकारियों ने पारदर्शी समीक्षा कर विवादित आदेशों पर पुनर्विचार की मांग की है।
बड़े सवाल
क्या पदस्थापनाओं में नियमों का पालन हुआ ?
क्या अनुभवी कर्मचारियों की उपेक्षा की गई ?
क्या प्रशासनिक निर्णयों में मनमानी हुई ?
क्या मुख्यालय इस विवाद की निष्पक्ष जांच कराएगा ?
यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल पोस्टिंग विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
