बांधवगढ़ के गाइड्स सीखेंगे फर्राटेदार अंग्रेजी, देश-विदेश के पर्यटकों को सुनाएंगे जंगल की कहानी
105 गाइड्स को मिलेगा विशेष स्पीकिंग प्रशिक्षण, वन्यजीव, इतिहास, संस्कृति और संरक्षण की जानकारी अंग्रेजी में प्रभावी ढंग से देने पर रहेगा जोर
उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में देश-विदेश से पहुंचने वाले पर्यटकों के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए रिजर्व प्रबंधन ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। अब बांधवगढ़ के गाइड्स न सिर्फ जंगल और वन्यजीवों की बारीकियां बताएंगे, बल्कि विदेशी पर्यटकों से फर्राटेदार अंग्रेजी में संवाद करते हुए बांधवगढ़ की वन्यजीव विरासत, इतिहास, संस्कृति और संरक्षण की कहानी भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेंगे।

इसी उद्देश्य से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के 105 गाइड्स और पर्यटन कार्यालय के स्टाफ को विशेष इंग्लिश स्पीकिंग प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए अहमदाबाद की अनुभवी मास्टर ट्रेनर तेजस्विनी रायजादा को आमंत्रित किया गया है।
31 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत
बांधवगढ़ में 31 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 7 सितंबर से हो गई है। प्रशिक्षण के लिए 105 गाइड्स को 35-35 के तीन समूहों में बांटा गया है। प्रत्येक समूह को सात दिनों का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के दौरान गाइड्स को केवल अंग्रेजी बोलना ही नहीं सिखाया जाएगा, बल्कि पर्यटकों के साथ सहज संवाद, सही उच्चारण, आत्मविश्वास के साथ बातचीत और जंगल से जुड़ी जानकारी को रोचक एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने का अभ्यास भी कराया जाएगा।
अहमदाबाद की मास्टर ट्रेनर देंगी प्रशिक्षण
गाइड्स को अंग्रेजी भाषा और संवाद कौशल का प्रशिक्षण देने के लिए अहमदाबाद से तेजस्विनी रायजादा को आमंत्रित किया गया है। वह अंग्रेजी भाषा संचार और व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में अनुभवी शिक्षिका हैं।
उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उन्हें ब्रिटिश काउंसिल से CEFR C1 स्तर का प्रमाणन भी प्राप्त है।
पर्यटकों के हर सवाल का आत्मविश्वास से देंगे जवाब
प्रशिक्षण के दौरान गाइड्स को सामान्य बातचीत, अंग्रेजी का सही उच्चारण, पर्यटकों के सवालों को समझकर जवाब देना, समूह के सामने प्रभावी प्रस्तुति देना और बातचीत के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखने जैसी महत्वपूर्ण बारीकियां सिखाई जाएंगी।
बांधवगढ़ में सफारी के दौरान गाइड पर्यटकों और जंगल के बीच सबसे महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाते हैं। बाघ, तेंदुआ, गौर, हिरण समेत अन्य वन्यजीवों के दिखाई देने पर उनके व्यवहार, रहन-सहन और प्राकृतिक परिवेश की जानकारी पर्यटकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी गाइड्स की ही होती है।
ऐसे में अंग्रेजी भाषा में बेहतर संवाद क्षमता विकसित होने से विदेशी पर्यटकों को वन्यजीवों से जुड़ी जानकारी समझने में आसानी होगी और उनका सफारी अनुभव भी और बेहतर हो सकेगा।
31 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक पहुंचे बांधवगढ़
बांधवगढ़ में विदेशी पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस प्रशिक्षण को खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पिछले पर्यटन वर्ष में 31 हजार से अधिक विदेशी पर्यटकों ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया।

विदेशी पर्यटकों के साथ सहज अंग्रेजी संवाद के जरिए गाइड्स अब उन्हें सिर्फ वन्यजीवों की जानकारी ही नहीं, बल्कि बांधवगढ़ की प्राकृतिक विरासत, स्थानीय संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों से भी बेहतर तरीके से जोड़ सकेंगे।
अंग्रेजी के साथ बांधवगढ़ की कहानी भी होगी मजबूत
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्रीय संचालक अनुपम सहाय ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य सिर्फ गाइड्स को अंग्रेजी भाषा सिखाना नहीं है। उन्हें इस तरह तैयार किया जा रहा है कि वे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बांधवगढ़ के वन्यजीव, इतिहास, संस्कृति और संरक्षण की कहानी आत्मविश्वास और प्रभावी तरीके से बता सकें।

उन्होंने कहा कि बेहतर संवाद क्षमता से पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों को समझने में मदद मिलेगी तथा बांधवगढ़ के प्रति उनका अनुभव और जुड़ाव और मजबूत होगा।
कान्हा के 59 नेचर गाइड्स भी ले रहे प्रशिक्षण
बांधवगढ़ के साथ-साथ कान्हा टाइगर रिजर्व में भी नेचर गाइड्स की संचार क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। बालाघाट के मुक्की वन परिक्षेत्र में 59 नेचर गाइड्स के लिए 15 दिवसीय इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स आयोजित किया जा रहा है।
यह प्रशिक्षण 31 अगस्त से 13 सितंबर तक चल रहा है। इसका उद्देश्य गाइड्स को देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के साथ अंग्रेजी में प्रभावी संवाद करने, वन्यजीव एवं जैव विविधता से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत करने और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक भाषा एवं संचार कौशल प्रदान करना है।
अब जंगल की कहानी सिर्फ दिखाई नहीं जाएगी, अंग्रेजी में सुनाई भी जाएगी
बांधवगढ़ और कान्हा में गाइड्स को अंग्रेजी प्रशिक्षण दिए जाने से वन्यजीव पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में पर्यटक जंगल की खूबसूरती और वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ स्थानीय इतिहास, संस्कृति और संरक्षण की कहानी भी बेहतर संवाद के साथ समझ सकेंगे।
