उमरिया में नल-जल योजनाओं पर बिजली बिल का भारी बोझ, 200 योजनाओं पर करीब 4 करोड़ रुपये बकाया
बिजली बिल नहीं चुकाने पर जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा, ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई नल-जल योजनाएं अब बिजली बिल के भारी बकाये के कारण संकट में नजर आ रही हैं। जानकारी के अनुसार जिले की करीब 200 नल-जल योजनाओं पर लगभग 4 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। बकाया राशि लगातार बढ़ने से कई ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि बिजली बिल का समय पर भुगतान नहीं होने के कारण कुछ स्थानों पर बिजली कनेक्शन काटे जाने की स्थिति भी सामने आई है। यदि बिजली आपूर्ति बाधित होती है तो पानी की मोटरें बंद हो सकती हैं, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों तक पानी पहुंचाने वाली नल-जल योजनाएं ठप पड़ सकती हैं।
योजना बनने के बाद पंचायतों को सौंपी जाती है जिम्मेदारी
ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा नल-जल योजनाओं का निर्माण कराया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विभाग कुछ समय तक योजना का ट्रायल संचालन करता है। इसके बाद योजना को संबंधित ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया जाता है।
योजना पंचायत को सौंपे जाने के बाद उसके संचालन, रखरखाव, बिजली बिल और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायत की होती है।
पीएचई अधिकारी ने बताई विभाग की भूमिका
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी एच.एस. धुर्वे के अनुसार, सरकार विभाग को नल-जल योजनाओं के निर्माण की जिम्मेदारी देती है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद विभाग कुछ दिनों तक योजना का संचालन करता है और इसके बाद उसे ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि योजना पंचायत को सौंपे जाने के बाद उसके रखरखाव और बिजली बिल सहित अन्य खर्चों का भुगतान पंचायत स्तर पर किया जाना होता है।
पंचायतों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
करीब 4 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया होने की जानकारी सामने आने के बाद पंचायतों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर ग्रामीणों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई योजनाएं अब बिजली बिल के कारण प्रभावित होने की स्थिति में हैं।
यदि समय रहते बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो बिजली कंपनी की कार्रवाई से कई नल-जल योजनाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है।
जिला पंचायत सीईओ बोले—नहीं मिली आधिकारिक सूचना
नल-जल योजनाओं के बिजली कनेक्शन काटे जाने के संबंध में जिला पंचायत प्रशासन के पास अब तक किसी पंचायत की ओर से आधिकारिक सूचना नहीं पहुंची है।
जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ने कहा कि उनके पास अभी तक किसी पंचायत से नल-जल योजना का बिजली कनेक्शन काटे जाने की जानकारी नहीं आई है। यदि किसी क्षेत्र में ऐसा मामला सामने आता है तो इस संबंध में मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से चर्चा की जाएगी।
हजारों ग्रामीणों की जरूरत से जुड़ी हैं योजनाएं
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि बिजली बिल का बकाया लगातार बढ़ता रहा और समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों की जलापूर्ति व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
बिजली कनेक्शन बंद होने की स्थिति में पानी की मोटरें नहीं चलेंगी और नलों तक पानी पहुंचना बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में ग्रामीणों को एक बार फिर हैंडपंप, कुएं और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों पर निर्भर होना पड़ सकता है।
