अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा बांधवगढ़ का इकोटूरिज्म मॉडल, स्थानीय समुदाय की भागीदारी को मिली सराहना
नई दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत हुआ बांधवगढ़ का मॉडल, पर्यटन के साथ वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका पर जोर
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अब केवल बाघों और वन्यजीवों के लिए ही नहीं, बल्कि इकोटूरिज्म और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के सफल मॉडल के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय टाइगर लैंडस्केप कार्यशाला में बांधवगढ़ के इकोटूरिज्म मॉडल को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया, जहां पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच बनाए गए संतुलन पर चर्चा हुई।

कार्यशाला में यह बताया गया कि किस प्रकार स्थानीय समुदायों को पर्यटन से जोड़कर न केवल रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं, बल्कि उन्हें वन एवं वन्यजीव संरक्षण का सहभागी भी बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में बांधवगढ़ की मजबूत मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, एशियाई विकास बैंक (ADB), राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यशाला के दूसरे दिन आयोजित विशेष सत्र ‘इकोटूरिज्म एवं सामुदायिक भागीदारी—होम-स्टे, गाइडिंग, रेवेन्यू शेयरिंग एवं विजिटर मैनेजमेंट मॉडल’ में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय, आईएफएस को विशेषज्ञ पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया।
इस सत्र की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने की।
पर्यटन से बदल रही गांवों की तस्वीर
डॉ. अनुपम सहाय ने बांधवगढ़ के इकोटूरिज्म मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि स्थानीय समुदाय पर्यटन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। प्रशिक्षित स्थानीय युवा गाइड और वाहन चालक पर्यटकों को जंगल सफारी और वन्यजीव दर्शन कराने के साथ-साथ उन्हें प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं।
बांधवगढ़ में पर्यटन केवल जंगल घूमने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
होम-स्टे से जिप्सी तक, स्थानीय लोगों को मिल रहे रोजगार के अवसर
बांधवगढ़ के इकोटूरिज्म मॉडल में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के कई अवसर विकसित किए गए हैं। इनमें—
- स्थानीय युवाओं को गाइडिंग का अवसर
- जिप्सी एवं पर्यटन वाहनों का संचालन
- गांवों में होम-स्टे की सुविधा
- स्थानीय खान-पान और उत्पादों को बढ़ावा
- होटल और रिसॉर्ट क्षेत्र में रोजगार
- पर्यटन से जुड़ी अन्य सेवाओं में भागीदारी
जैसे अवसर शामिल हैं।
इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आय के नए साधन मिल रहे हैं और पर्यटन का लाभ गांवों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
पर्यटन की आय में स्थानीय समुदाय की भागीदारी
कार्यशाला में मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्वों में अपनाई जा रही उस व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया, जिसके तहत पर्यटन से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा स्थानीय समुदायों के हित और विकास से जोड़ा जाता है।
इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचे, जो जंगलों के आसपास रहने वाले समुदायों का हिस्सा हैं।
संरक्षण और आजीविका का अनोखा संतुलन
बांधवगढ़ मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है।
जब स्थानीय लोगों को पर्यटन और जंगल से जुड़े वैध रोजगार के अवसर मिलते हैं, तो उनमें वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी और सहभागिता भी बढ़ती है। यही सोच बांधवगढ़ के इकोटूरिज्म मॉडल को विशेष बनाती है।
राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ी बांधवगढ़ की पहचान
नई दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में बांधवगढ़ के मॉडल की प्रस्तुति उमरिया जिले और पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। यह पहल बताती है कि जिम्मेदार पर्यटन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी और वन्यजीव संरक्षण को एक साथ लेकर आगे बढ़ा जा सकता है।
