जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रियदर्शन शर्मा ने दिलाई शपथ, अधिवक्ता परिषद सदस्य दिनेश नारायण पाठक रहे विशेष अतिथि; न्यायपालिका और अधिवक्ताओं ने न्याय व्यवस्था को और मजबूत बनाने का लिया संकल्प

Kamlesh Yadav | Umaria
मानपुर तहसील अधिवक्ता संघ मानपुर का शपथ ग्रहण समारोह रविवार को न्यायिक गरिमा, अनुशासन और भव्यता के बीच संपन्न हुआ। समारोह की सबसे बड़ी विशेषता रही कि जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री प्रियदर्शन शर्मा ने स्वयं नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य श्री दिनेश नारायण पाठक विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समारोह की अध्यक्षता संघ के संस्थापक सदस्य एवं संरक्षक वरिष्ठ अधिवक्ता दरबारी लाल पटेल ने की। कार्यक्रम में जिला अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती नजमा बेगम, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दीपक अग्रवाल, न्यायिक दंडाधिकारी श्री धुर्वे तथा मानपुर सिविल न्यायालय के न्यायिक दंडाधिकारी श्री सतीश शुक्ला की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण सुश्री श्रद्धा द्विवेदी ने दिया, जिसके बाद नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का माल्यार्पण एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर आत्मीय सम्मान किया। इसके बाद नवनिर्वाचित अध्यक्ष कुशलेंद्र कुमार तिवारी सहित पूरी कार्यकारिणी ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। इस दौरान जिला अधिवक्ता संघ उमरिया के अध्यक्ष पुष्पराज सिंह एवं तहसील अधिवक्ता संघ जयसिंहनगर के अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद तिवारी की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनिरुद्ध मिश्रा, दरबारी लाल पटेल, संतोष तिवारी और नागिन पटेल ने नई कार्यकारिणी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। समारोह में अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों, सदस्य अधिवक्ताओं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन को यादगार बना दिया। वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद चतुर्वेदी ने आभार व्यक्त किया, जबकि मंच संचालन एडवोकेट विकास गुप्ता ने प्रभावी ढंग से किया।
कार्यक्रम के अंत में दिवंगत वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज द्विवेदी को दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि न्यायपालिका और अधिवक्ता समाज का समन्वय ही आम नागरिकों के न्याय के अधिकार को और अधिक सशक्त बनाता है।
