
kamlesh Yadav।Umaria
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में आयोजित सातवें डॉग रिफ्रेशर कोर्स का सफल समापन हो गया। 16 से 19 जुलाई तक चले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के विभिन्न टाइगर रिजर्व और वन्यजीव क्षेत्रों से आए डॉग स्क्वॉड, डॉग हैंडलर और सहायक हैंडलरों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य वन्यजीव अपराधों की जांच को और अधिक प्रभावी बनाना तथा खोजी कुत्तों की क्षमता को आधुनिक तकनीकों के अनुरूप विकसित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान डॉग स्क्वॉड को ट्रैकिंग, सेंट डिस्क्रिमिनेशन, ह्यूमन बॉडी सर्च, क्राइम सीन मैनेजमेंट, पीटी परेड और आज्ञा पालन जैसे कठिन अभ्यास कराए गए। इन अभ्यासों के माध्यम से डॉग हैंडलरों और खोजी कुत्तों की कार्यकुशलता को परखा गया और उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में रीवा, शहडोल, भोपाल, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व तथा मध्य प्रदेश उद्यान एवं राष्ट्रीय उद्यान की डॉग स्क्वॉड टीमों ने भाग लिया। प्रशिक्षण और मूल्यांकन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि शहडोल डॉग स्क्वॉड दूसरे स्थान पर रही। विजेता टीमों को प्रमाण-पत्र, जैकेट और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. राजेश तोमर तथा जबलपुर से आए वरिष्ठ पशु चिकित्सकों की टीम ने खोजी कुत्तों का स्वास्थ्य परीक्षण भी किया। साथ ही डॉग हैंडलरों और सहायक हैंडलरों का भी मेडिकल चेकअप कराया गया।
वन अधिकारियों के अनुसार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम वन्यजीव अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड शिकार, तस्करी और अन्य वन्यजीव अपराधों के मामलों में अहम सुराग जुटाने और अपराधियों तक पहुंचने में वन विभाग की प्रभावी सहायता करते हैं।
