
kamlesh Yadav। Umaria
घुंघुटी क्षेत्र में प्रस्तावित कॉलरी परियोजना को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और रोजगार के मुद्दों पर भारतीय किसान संघ ने 21 जुलाई को उमरिया कलेक्टर कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि जिले के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में किसान इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने मजबूती से रखेंगे। “जमीन हमारी, फैसला हमारा” के नारे के साथ किसान संघ ने ग्रामीणों से आंदोलन में व्यापक भागीदारी की अपील की है। संगठन का आरोप है कि कॉलरी परियोजना से प्रभावित किसानों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जिससे क्षेत्र में असंतोष लगातार गहराता जा रहा है। किसानों का कहना है कि उनकी कृषि भूमि ही उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में बिना पर्याप्त सहमति, पारदर्शिता और न्यायोचित मुआवजे के भूमि अधिग्रहण किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि उन्हें उचित मुआवजा, परिवार के पात्र सदस्यों को रोजगार तथा कानून के तहत मिलने वाले सभी अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। भारतीय किसान संघ ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। संगठन का आरोप है कि किसानों द्वारा उठाई जा रही शिकायतों और आशंकाओं पर अपेक्षित गंभीरता से कार्रवाई नहीं की जा रही है। साथ ही, कथित अनियमितताओं और प्रशासनिक स्तर पर हुई संभावित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है।भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि 21 जुलाई को किसान शांतिपूर्ण तरीके से उमरिया पहुंचकर अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल जमीन का नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य, आजीविका और सम्मान से जुड़ा हुआ है। घुंघुटी कॉलरी परियोजना को लेकर बढ़ते विरोध के बीच अब पूरे जिले की नजर 21 जुलाई को प्रस्तावित किसान जनआंदोलन पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन किसानों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और विवाद के समाधान के लिए संवाद एवं सहमति की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं।
