
kamlesh Yadav | Umaria
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पिछले 11 दिनों से लापता मानी जा रही कॉलर लगी मादा बाघिन को आखिरकार पार्क प्रबंधन ने रविवार, 12 जुलाई को उसके होम रेंज में सुरक्षित खोज निकाला। बाघिन के रेडियो कॉलर से 1 जुलाई 2026 की दोपहर लगभग 2 बजे के बाद अचानक जीपीएस/वीएचएफ सिग्नल मिलना बंद हो गया था, जिसके बाद पूरे वन महकमे में चिंता का माहौल बन गया था। बाघिन की तलाश के लिए शुरू हुआ अभियान धीरे-धीरे एक बड़े सर्च ऑपरेशन में बदल गया। शुरुआत में वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में सुरक्षा श्रमिकों और बीट गार्डों की टीमों ने जंगल में लगातार गश्त की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद खोज अभियान का दायरा बढ़ाया गया और अलग-अलग विशेष टीमों को मैदान में उतारा गया। लगातार हो रही बारिश, दुर्गम पहाड़ियां, घने जंगल और फिसलन भरे रास्तों के बावजूद खोज अभियान बिना रुके जारी रहा। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, मध्यप्रदेश के मार्गदर्शन में क्षेत्र संचालक, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व ने विशेष खोज दल का गठन किया, जिसमें वन्यप्राणी स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश तोमर तथा वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ डॉ. प्रशांत देशमुख को भी शामिल किया गया। सर्च ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के लिए दो प्रशिक्षित हाथियों, महावतों, अतिरिक्त वीएचएफ रिसीवर एंटीना, ट्रैप कैमरों तथा आधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया गया। वीएचएफ सर्च के लिए रिसीवर एंटीना की संख्या एक से बढ़ाकर चार कर दी गई, ताकि रेडियो सिग्नल के आधार पर बाघिन का पता लगाया जा सके। संभावित स्थानों पर ट्रैप कैमरे लगाए गए, लेकिन बाघिन किसी भी कैमरे में कैद नहीं हुई। इसके बाद खोजी दल ने जोखिम उठाते हुए पदचिन्हों के आधार पर सर्च जारी रखा। करीब 100 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र की गहन तलाशी ली गई। रविवार को डॉग स्क्वाड को भी अभियान में शामिल किया गया तथा ग्रामीणों से मिली सूचनाओं का भी विश्लेषण किया गया। आखिरकार खोजी दल को सबसे पहले बाघिन के पदचिन्ह मिले। इसके बाद हाथियों की मदद से संबंधित क्षेत्र में पहुंचकर कॉलर लगी मादा बाघिन को उसके प्राकृतिक होम रेंज में सुरक्षित खोज लिया गया। पार्क प्रबंधन के अनुसार बाघिन पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि उसका रेडियो कॉलर पूरी तरह बंद हो चुका था, जिसके कारण 11 दिनों तक उसकी लोकेशन प्राप्त नहीं हो सका। बाघिन के सुरक्षित मिलने से वन विभाग ने राहत की सांस ली है और अब उसके रेडियो कॉलर की तकनीकी जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
