बांधवगढ़ सफारी बुकिंग पर बड़ा सवाल: 60 सेकंड में फुल सीटें, वायरल टिकटों ने बढ़ाई ‘सॉफ्टवेयर सिंडिकेट’ की आशंका
विशेष खोजी रिपोर्ट | बांधवगढ़ | 25 मई 2026
मध्यप्रदेश के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ऑनलाइन जंगल सफारी टिकट बुकिंग को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब इस पूरे मामले में एक नया और गंभीर मोड़ तब आया, जब 25 मई की तत्काल बुकिंग से जुड़ी कुछ कथित संदिग्ध टिकटों को स्थानीय कियोस्क संचालकों द्वारा सोशल मीडिया और विभिन्न समूहों में वायरल एवं सार्वजनिक किया गया।
इन वायरल टिकटों को लेकर दावा किया जा रहा है कि कुछ टिकटें प्रारंभिक चरण में बिना पर्यटक नाम या अधूरी जानकारी के बुक दिखाई दीं, जबकि बाद में उनमें नाम अपडेट होते नजर आए। यदि यह दावा तकनीकी जांच में सही पाया जाता है, तो यह सिर्फ टिकट कालाबाजारी नहीं बल्कि ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम की विश्वसनीयता और साइबर सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न माना जा सकता है।


वायरल टिकटों ने बढ़ाई जांच की मांग
स्थानीय कियोस्क संचालकों का आरोप है कि 25 मई की बुकिंग प्रक्रिया के दौरान कुछ चुनिंदा आईडी पर अत्यंत कम समय में बड़ी संख्या में टिकटें बुक हुईं। बाद में इन्हीं टिकटों के स्क्रीनशॉट और विवरण कथित रूप से वायरल किए गए, जिनमें बुकिंग समय, अधूरी जानकारी और बाद में अपडेट हुए नामों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
इन वायरल दस्तावेजों के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर यह मांग तेज हो गई है कि संबंधित बुकिंग लॉग, आईडी, पेमेंट टाइमिंग और सर्वर एक्टिविटी की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।
60 सेकंड में ‘नो रूम’, आम पर्यटक परेशान
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि बुकिंग विंडो खुलने के कुछ ही सेकंड के भीतर अधिकांश सफारी सीटें “No Room” दिखाने लगती हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ एजेंटों द्वारा “गारंटीड टिकट” उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, जिससे आम पर्यटकों में नाराजगी बढ़ रही है।
छोटे कियोस्क संचालकों का कहना है कि वैध प्रक्रिया अपनाने के बावजूद वे टिकट नहीं निकाल पा रहे, जबकि कथित तौर पर कुछ चुनिंदा नेटवर्क लगातार सफल बुकिंग कर रहे हैं।
साइबर हेरफेर की आशंका पर उठे सवाल
तकनीकी जानकारों का मानना है कि यदि किसी टिकटिंग सिस्टम में बुकिंग के बाद डेटा संशोधन, नाम अपडेट या असामान्य गति से टिकट ब्लॉकिंग जैसी गतिविधियां हो रही हैं, तो उसकी साइबर फॉरेंसिक जांच आवश्यक हो जाती है।
हालांकि अभी तक किसी भी एजेंसी ने आधिकारिक रूप से हैकिंग या अवैध सॉफ्टवेयर उपयोग की पुष्टि नहीं की है, लेकिन वायरल टिकटों और स्थानीय आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
STF और साइबर सेल जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों और सामान्य कियोस्क संचालकों ने मांग की है कि:
संदिग्ध आईडी तत्काल चिन्हित की जाएं,
25 मई की सभी बुकिंग का ऑडिट कराया जाए,
वायरल टिकटों की फॉरेंसिक जांच हो,
तथा आवश्यक होने पर राज्य साइबर सेल और एसटीएफ स्तर पर विशेष जांच टीम गठित की जाए।
पारदर्शिता पर उठ रहे बड़े सवाल
ऑनलाइन सफारी व्यवस्था को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों और वायरल दस्तावेजों ने अब इस पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है।
फिलहाल संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन 25 मई की कथित संदिग्ध टिकटों के वायरल होने के बाद मामला अब केवल स्थानीय शिकायत तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह प्रदेश स्तर के साइबर और प्रशासनिक जांच के मुद्दे के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।

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