मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। ताला जोन में पर्यटक वाहनों द्वारा निर्धारित मार्ग से हटकर प्रतिबंधित (बंद) रूट में प्रवेश करने की घटना ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ पर्यटक वाहनों ने नियमों की अनदेखी करते हुए “घोड़ा डेमन” नामक बाघ के विश्राम स्थल तक पहुंच बनाई। बताया जाता है कि बेहतर दृश्य और फोटोग्राफी के लिए वाहनों को पहाड़ी क्षेत्र तक ले जाया गया, जो कि निर्धारित पर्यटन मार्ग से बाहर है और सामान्यतः प्रतिबंधित माना जाता है।
घटना से संबंधित कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिन्हें पर्यटकों द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराया गया है। इन तस्वीरों के आधार पर मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा रहा है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे प्रश्न ?
घटना के बाद पर्यटकों ने प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था को कमजोर बताते हुए कहा कि यदि नियमित निगरानी और नियंत्रण सख्त होता, तो इस प्रकार की गतिविधियां संभव नहीं होतीं।
वन्यजीवों पर प्रभाव की आशंका
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के विश्राम स्थल में इस प्रकार की मानव गतिविधियां उनके स्वाभाविक व्यवहार को प्रभावित कर सकती हैं। लगातार हस्तक्षेप से बाघों में तनाव बढ़ने और उनके आक्रामक होने की आशंका भी जताई गई है, जिससे मानव-बाघ संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
पर्यटकों ने इस मामले में भोपाल स्थित मुख्य वन्यजीव संरक्षक (CWLW) अधिकारी मैडम राजोरा से निष्पक्ष जांच कराए जाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उच्च स्तर पर जांच होती है, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
बड़ा प्रश्न ?
क्या बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है, या पर्यटन दबाव के कारण नियमों का पालन प्रभावित हो रहा है?


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