टाइगर बना ‘महुआ चोर’, साहब बने ‘मूकदर्शक’: बांधवगढ़ में सुरक्षा के नाम पर बड़ा ‘सर्कस’!
बंदरचुई (पनपथा बफर) में बाघ ने ग्रामीण का थैला छीना: गश्त के नाम पर करोड़ों का बजट ‘गुल’, ग्रामीण ‘राम भरोसे’!
Bandhavgarhnews.com
विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो कभी बाघों के संरक्षण का ‘मॉडल’ था, अब प्रबंधन की घोर लापरवाही का ‘पोस्टर’ बनता जा रहा है। रविवार (5 अप्रैल 2026) की शाम पनपथा बफर के बंदरचुई इलाके से सामने आए एक खौफनाक वीडियो ने वन विभाग की सुरक्षा व्यवस्था को ‘नंगा’ कर दिया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे एक बेबस ग्रामीण पेड़ के पीछे अपनी जान की भीख मांग रहा है और एक बाघ बड़े इत्मीनान से उसके महुए का थैला मुंह में दबाकर जंगल की ओर निकल जाता है।
करोड़ों की गश्त, फिर भी बाघ के सामने निहत्था किसान?
पार्क प्रबंधन हर साल वन्यजीवों की निगरानी और गश्त के नाम पर करोड़ों रुपये डकार जाता है, लेकिन धरातल पर हकीकत ‘शून्य’ है। जब महुआ सीजन में सैकड़ों ग्रामीण जंगल का रुख करते हैं, तब वन अमला कहाँ ‘खर्राटे’ ले रहा था? बंदरचुई जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बाघों की मूवमेंट का पता न होना प्रबंधन की भारी विफलता है। क्या विभाग किसी ‘लाश’ के गिरने का इंतज़ार कर रहा है?
रेंजर की ‘रटी-रटाई’ सलाह: जख्मों पर नमक!
रेंजर प्रतीक श्रीवास्तव ने मामले पर लीपापोती करते हुए ग्रामीणों को ‘सतर्क रहने’ और ‘समूह में जाने’ की नसीहत दी है। सवाल यह है कि क्या केवल ‘एडवाइजरी’ जारी करने से विभाग की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है? जब गश्ती दल नदारद है, तो गरीब ग्रामीण अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें? यह सलाह सुरक्षा देने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसी है।
पर्यटकों से ‘मोह’, ग्रामीणों से ‘विद्रोह’?
सूत्रों की मानें तो पार्क प्रबंधन का पूरा ध्यान ताला जोन में रसूखदार होटलों की जिप्सियों को बाघ दिखाने और वीआईपी सेवा में लगा रहता है। बफर जोन के उन ग्रामीणों की जान की कीमत विभाग के लिए शायद कुछ भी नहीं है, जो जंगल पर निर्भर हैं।
खतरे की घंटी: इंसानों से बेखौफ हुआ टाइगर!
बाघ का इंसान के इतने करीब आकर उसका सामान उठा ले जाना यह साबित करता है कि अब उसे इंसानी आहट से डर नहीं लगता। यह ‘मानव-वन्यजीव संघर्ष’ की एक बड़ी और खूनी आहट है। अगर समय रहते फील्ड डायरेक्टर महोदय ने एसी कमरों से बाहर निकलकर अमले की नकेल नहीं कसी, तो बांधवगढ़ में कभी भी बड़ा मातम पसर सकता है
कहाँ थी गश्ती टीम?: जिस समय बाघ ग्रामीण के पास पहुँचा, उस इलाके का बीट गार्ड और गश्ती दल कहाँ था?
GPS ट्रैकिंग फेल?: करोड़ों के बजट वाली वायरलेस और GPS निगरानी प्रणाली उस समय काम क्यों नहीं कर रही थी?
जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब?: इस गंभीर सुरक्षा चूक के लिए क्या संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरेगी या मामला रफा-दफा होगा?

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