बांधवगढ़ का ‘कॉलर वन’ हाथी पहुंचा यूपी, साथी हथिनी संग मिर्जापुर-प्रयागराज के जंगलों में डेरा

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला रेडियो कॉलर हाथी मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश पहुंच गया है। ‘कॉलर वन’ नाम से पहचाना जाने वाला यह हाथी अपनी साथी हथिनी के साथ मिर्जापुर और प्रयागराज के जंगलों में विचरण कर रहा है। वन विभाग रेडियो कॉलर के माध्यम से दोनों हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। 

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की पहचान देश-दुनिया में बाघों के लिए है, लेकिन अब यहां हाथियों का बढ़ता कुनबा भी एक नई पहचान बनता जा रहा है। बांधवगढ़ के जंगलों में वर्षों से रह रहे हाथियों की गतिविधियां अब मध्यप्रदेश की सीमाओं से बाहर तक पहुंचने लगी हैं।

बांधवगढ़ का रेडियो कॉलर लगाया गया ‘कॉलर वन’ हाथी इन दिनों अपनी एक साथी हथिनी के साथ उत्तर प्रदेश के जंगलों में विचरण कर रहा है। दोनों हाथियों ने अगस्त 2026 के अंतिम सप्ताह में मध्यप्रदेश की सीमा पार की और उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ गए। वर्तमान में उनकी गतिविधियां मिर्जापुर और प्रयागराज क्षेत्र के जंगलों में दर्ज की जा रही हैं।

रेडियो कॉलर से हो रही लगातार निगरानी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय के अनुसार, उत्तर प्रदेश पहुंचे दोनों हाथियों में एक के गले में रेडियो कॉलर लगा हुआ है। इसी रेडियो कॉलर के जरिए वन विभाग उसकी लोकेशन और गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है।

हाथी के साथ एक हथिनी भी मौजूद है। दोनों लंबे समय से एक साथ विचरण कर रहे हैं और अब प्रयागराज क्षेत्र के जंगलों में उनकी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

फरवरी में निकला था बांधवगढ़ से

‘कॉलर वन’ हाथी की यह लंबी यात्रा बेहद दिलचस्प रही है। फरवरी 2026 में यह बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की सीमा से बाहर निकला था। इसके बाद उसने धीरे-धीरे नए जंगलों और क्षेत्रों की ओर अपना सफर शुरू किया।

बांधवगढ़ से निकलने के बाद हाथी ने—

बांधवगढ़ → शहडोल → सीधी → रीवा → उत्तर प्रदेश

का लंबा सफर तय किया।

रीवा के जंगलों में यह हाथी लंबे समय तक विचरण करता रहा। इसके बाद अगस्त के अंतिम सप्ताह में उसने मध्यप्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के जंगलों में प्रवेश कर लिया। अब उसका सफर मिर्जापुर और प्रयागराज क्षेत्र तक पहुंच चुका है।

नवंबर 2024 में लगा था पहला रेडियो कॉलर

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में नवंबर 2024 में पहली बार एक हाथी को रेडियो कॉलर लगाया गया था। इसी हाथी को बाद में ‘कॉलर वन’ नाम दिया गया।

रेडियो कॉलर लगाने के बाद इसे बांधवगढ़ के ताला क्षेत्र में रिलीज किया गया था। इसके बाद यह ताला, खितौली और मगधी क्षेत्र सहित बांधवगढ़ के विभिन्न जंगलों में विचरण करता रहा।

हाथियों की गतिविधियों और उनके मूवमेंट को समझने के लिए वन विभाग ने बाद में अन्य हाथियों को भी रेडियो कॉलर लगाया। दिसंबर 2024 में दूसरे हाथी को रेडियो कॉलर लगाया गया, जिसे ‘कॉलर टू’ नाम दिया गया। इसके बाद 2 सितंबर 2025 को तीसरे हाथी को भी रेडियो कॉलर लगाया गया।

बांधवगढ़ में बढ़ रहा हाथियों का कुनबा

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और आसपास के जंगलों में वर्तमान में हाथियों की संख्या करीब 70 से 80 के बीच बताई जा रही है। वर्ष 2018 के आसपास हाथियों ने बांधवगढ़ के जंगलों में स्थायी रूप से रहना शुरू किया था।

समय के साथ उनका कुनबा बढ़ता गया और अब हाथियों की गतिविधियां बांधवगढ़ और आसपास के क्षेत्रों से निकलकर मध्यप्रदेश के दूसरे जिलों और पड़ोसी राज्यों तक पहुंचने लगी हैं।

रीवा में की गई थी विशेष मॉनिटरिंग की व्यवस्था

जब ‘कॉलर वन’ हाथी लंबे समय तक रीवा के जंगलों में विचरण कर रहा था, तब उसकी निगरानी को आसान बनाने के लिए रेडियो कॉलर मॉनिटरिंग की व्यवस्था स्थानीय स्तर पर की गई थी।

बांधवगढ़ से लगातार टीमों का आना-जाना आसान नहीं था, इसलिए रीवा क्षेत्र में भी हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था की गई। अब हाथी के उत्तर प्रदेश पहुंचने के बाद संबंधित वन विभाग की टीमें उसकी गतिविधियों की निगरानी कर रही हैं।

जंगल की सीमाएं नहीं मानता वन्यजीवों का सफर

बांधवगढ़ का ‘कॉलर वन’ हाथी अब वन विभाग के लिए विशेष निगरानी का विषय बना हुआ है। उसका बांधवगढ़ से निकलकर शहडोल, सीधी और रीवा होते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंचना वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही का बड़ा उदाहरण है।

यह सफर एक बार फिर साबित करता है कि वन्यजीव प्रशासनिक सीमाओं को नहीं पहचानते। उनके लिए जंगलों और प्राकृतिक गलियारों की निरंतरता सबसे महत्वपूर्ण होती है।

बांधवगढ़ के जंगलों से शुरू हुआ ‘कॉलर वन’ का सफर अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच चुका है और वन विभाग रेडियो कॉलर के जरिए उसके हर कदम पर नजर बनाए हुए है।

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