उमरिया
भीषण गर्मी के बीच बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सामने आई एक तस्वीर ने वन विभाग के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। तस्वीर में एक बाघ सूखे इलाके में पानी की तलाश में भटकता दिखाई दे रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि जंगल में जलस्रोतों की स्थिति चिंताजनक हो सकती है।
वन विभाग की नियमित बैठकों में यह दावा किया जाता रहा है कि सभी प्रमुख जलस्रोतों में समय-समय पर पानी भरा जा रहा है तथा टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। हालांकि, सामने आई तस्वीर और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी इन दावों से भिन्न स्थिति की ओर इशारा कर रही है।

स्थानीय स्तर पर उठे सवाल ?

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जल प्रबंधन से संबंधित व्यवस्थाएं कागजी कार्यवाही तक सीमित रह जाने की आशंका जताई जा रही है। कई स्थानों पर प्राकृतिक जलस्रोत सूखने लगे हैं, जिससे वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। इस स्थिति ने प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वन्यजीवों पर बढ़ता दबाव !

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में जलस्रोतों की कमी वन्यजीवों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। पानी की तलाश में जानवरों का दायरा बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ जाती है, जो सुरक्षा की दृष्टि से चिंताजनक है।

जांच की मांग तेज

मामला सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों, पर्यटकों और सामाजिक संगठनों द्वारा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई जा रही है। मांग की जा रही है कि जलस्रोतों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

One thought on “*प्यास से बेहाल बाघों ने खोली व्यवस्था की पोल बांधवगढ़ में जलस्रोत सूखे, कागजों में ‘भरपूर’ पानी के दावे सवालों के घेरे में*”

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