मध्यप्रदेश जबलपुर उच्च न्यायालय ने वन विभाग से जुड़े एक मामले में आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में पदस्थ अपर मुख्य सचिव (वन) अशोक वर्णवाल सहित संबंधित अन्य अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने शपथ पत्र प्रस्तुत करने वाली अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, म.प्र. कर्मचारी कांग्रेस संगठन की ओर से अवमानना याचिका (कंटेंप्ट पिटिशन क्रमांक 5014/2025) दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि उपवन क्षेत्रपाल से कार्यवाहक वनक्षेत्रपाल के पद पर प्रभार दिए जाने संबंधी, उच्च न्यायालय के डब्ल्यूपी क्रमांक 19886/2025 में पारित आदेश का पालन नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई 1 अप्रैल 2026 को हुई, जिसमें शासन की ओर से प्रस्तुत जवाब पर न्यायालय ने असंतोष व्यक्त किया। न्यायालय ने कहा कि प्रस्तुत जवाब परस्पर विरोधाभासी है तथा आदेश के पालन का स्पष्ट प्रमाण नहीं है।

⚖️ संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही
अशोक वर्णवाल, अपर मुख्य सचिव (वन), भोपाल
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-2), वन भवन भोपाल
श्रीमती कमोलिका मोहंता, संबंधित प्रभारी अधिकारी
न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली अधिकारी श्रीमती कमोलिका मोहंता को 10 अप्रैल 2026 को न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा।
यह अवमानना याचिका म.प्र. कर्मचारी कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष मुनेन्द्र सिंह परिहार द्वारा दायर की गई थी।
मामले में न्यायालय की सख्ती के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अब अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।_

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