तीन माह में 3308 के लक्ष्य के मुकाबले 2961 नमूनों की ही जांच, बारिश बनी बड़ी वजह

किसानों को खेत की मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति की सही जानकारी देने और फसल के लिए संतुलित मात्रा में खाद एवं उर्वरक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए मृदा परीक्षण कराया जाता है। उमरिया जिले में भी इसके लिए मिट्टी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशालाओं में जांच की जाती है। लेकिन इस बार निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप नमूने प्रयोगशाला तक नहीं पहुंच सके। लक्ष्य से 347 सैंपल कम कृषि विभाग ने 1 अप्रैल से 30 जून तक जिले में कुल 3308 मिट्टी के नमूनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया था। तीन माह की अवधि में प्रयोगशाला को 2961 सैंपल ही प्राप्त हुए। इस तरह तय लक्ष्य की तुलना में 347 नमूने कम पहुंचे।हालांकि प्राप्त सभी 2961 नमूनों की जांच पूरी कर ली गई है, लेकिन लक्ष्य से कम सैंपल आने के कारण निर्धारित संख्या में मृदा परीक्षण नहीं हो सका।
सैंपल जुटाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग की

खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर उन्हें संबंधित प्रयोगशाला तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कृषि विभाग की होती है। जिले और ब्लॉक स्तर पर मृदा परीक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जांच के बाद मिट्टी में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलता है, जिसके आधार पर किसान अपनी फसल की जरूरत के अनुसार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बारिश के कारण नहीं लिए जा सके पर्याप्त नमूने मृदा विशेषज्ञ शत्रुघ्न तिवारी के अनुसार प्रयोगशाला में प्राप्त सभी 2961 नमूनों की जांच पूरी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले कम सैंपल प्राप्त होने के कारण लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। वहीं कृषि विभाग के उपसंचालक संग्राम सिंह ने बताया कि बारिश के कारण खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्र करने में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि अगले सीजन में कमी को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। धान की बुवाई से पहले मृदा जांच किसानों के लिए फायदेमंदमृदा परीक्षण के जरिए किसान अपने खेत में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश समेत अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता और कमी का पता लगा सकते हैं। रिपोर्ट के आधार पर जरूरत के मुताबिक उर्वरकों का इस्तेमाल करने से अनावश्यक खर्च कम किया जा सकता है और मिट्टी की सेहत बनाए रखने के साथ फसल उत्पादन में भी सुधार की संभावना रहती है।धान की बुवाई से पहले यदि किसान खेत की मिट्टी की जांच करा लें, तो फसल की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन करना अधिक प्रभावी हो सकता है।

