अब क्यूजीआईएस से होगी बांधवगढ़ के जंगलों की ‘डिजिटल निगरानी’

वन सीमाओं से लेकर पौधरोपण और वन्यजीव रहवास तक—जीआईएस तकनीक से आधुनिक होगा वन प्रबंधन

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगल की निगरानी और वन प्रबंधन व्यवस्था को अब आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जा रहा है। वन क्षेत्रों की सीमाओं, पौधरोपण, वन्यजीव रहवास प्रबंधन और अन्य मैदानी गतिविधियों की सटीक निगरानी के लिए क्यूजीआईएस (QGIS) तकनीक का उपयोग बढ़ाने की दिशा में वन विभाग ने कदम आगे बढ़ाया है। इसी क्रम में खितौली रेंज के परिक्षेत्र अधिकारी स्वस्ति श्री जैन एवं पनपथा बफर के परिक्षेत्र अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव ने भोपाल स्थित वन भवन में आयोजित दो दिवसीय क्यूजीआईएस प्रशिक्षण में भाग लिया। प्रशिक्षण का आयोजन वन विभाग की आईटी शाखा द्वारा किया गया।

जियो रेफरेंसिंग और डिजिटाइजेशन की मिली जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को जियो रेफरेंसिंग, डिजिटाइजेशन, फाइल कन्वर्जन सहित जीआईएस से जुड़ी विभिन्न तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वन भवन की जीआईएस एनालिस्ट संगीता यादव एवं परवेज खान ने अधिकारियों को क्यूजीआईएस की तकनीकी बारीकियों और इसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी।

डिजिटल नक्शों से आसान होगी जंगल की निगरानी क्यूजीआईएस एक ओपन-सोर्स जीआईएस प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से वन क्षेत्रों से संबंधित विभिन्न जानकारियों को डिजिटल नक्शों पर दर्ज और विश्लेषित किया जा सकता है। इसके जरिए वन सीमाओं, पौधरोपण क्षेत्रों, वन्यजीव रहवास, प्रबंधन कार्यों और अन्य गतिविधियों का भौगोलिक रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

इस तकनीक के उपयोग से मैदानी अमले को किसी क्षेत्र की स्थिति, गतिविधियों और प्रबंधन कार्यों का अधिक सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। साथ ही, विभिन्न स्थानों से प्राप्त जानकारी को डिजिटल रूप में व्यवस्थित कर उसकी निगरानी और रिपोर्टिंग भी आसान हो सकेगी।

अधिकारियों से लेकर वनरक्षकों तक पहुंचेगी तकनीकी दक्षता वन विभाग की योजना क्यूजीआईएस तकनीक को केवल अधिकारियों तक सीमित रखने के बजाय इसे डीएफओ स्तर से लेकर मैदानी वनरक्षकों तक पहुंचाने की है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि वन प्रबंधन और निगरानी से जुड़ी मैदानी गतिविधियों में तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था में आएगी और सटीकता

बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व में जीआईएस आधारित डिजिटल मैपिंग आने वाले समय में वन प्रबंधन की कार्यप्रणाली को और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे जंगल की सीमाओं से लेकर संरक्षण और प्रबंधन कार्यों तक की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी और मैदानी स्तर पर लिए जाने वाले निर्णयों में भी बेहतर भौगोलिक जानकारी का उपयोग किया जा सकेगा।

वन विभाग की यह पहल जंगल की निगरानी व्यवस्था को पारंपरिक तरीकों से आगे ले जाकर डेटा और डिजिटल तकनीक आधारित वन प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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